याचिकाकर्ता के वकील द्वारा प्रस्तुत दलीलों के मद्देनजर, प्रतिवादियों को पुनर्विचार याचिका का नोटिस जारी किया जाए और उन्हें 15 जुलाई, 2026 तक उचित जवाब दाखिल करने को कहा जाए।” मंदर ने असम के तिनसुकिया जिले के डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान 27 जनवरी को कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने के मामले में अप्रैल में शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह करते हुए आवेदन दायर किया था। याचिका के अनुसार, शर्मा ने कथित तौर पर कहा था कि असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ‘‘चार से पांच लाख मिया मतदाताओं’’ का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए ‘मिया’ एक अपमानजनक शब्द है, और गैर-बांग्ला भाषी लोग आमतौर पर उन्हें बांग्लादेशी मानते हैं। मंदर ने अपने आवेदन में यह भी दावा किया कि असम के मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर यह कहकर ‘मिया’ समुदाय के खिलाफ लोगों को भड़काया कि ‘‘वे तभी असम छोड़ेंगे जब उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा’’ और ‘‘हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में मतदान न कर सकें’’।
दिल्ली । एक अदालत ने ‘मिया मुसलमानों’ संबंधी टिप्पणी को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को नोटिस जारी किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने कार्यकर्ता हर्ष मंदर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शर्मा को नोटिस जारी किया। यह याचिका मजिस्ट्रेट अदालत के 20 अप्रैल के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें भाजपा नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने 26 मई के अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता के वकील ने याचिकाकर्ता की पुनर्विचार याचिका के साथ शून्य प्राथमिकी और ई-प्राथमिकी के लिए प्रस्तुत गृह मंत्रालय द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की ओर मेरा ध्यान आकृष्ट किया।

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